bewafa shayari

Bewafa Shayari – बेवफा शायरी

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बेवफा शायरी 

ऐ मोहब्बत तू शर्म से डूब मर,
तू एक शख्स को मेरा ना कर सकी.


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अजीब है महोब्बत का खेल,
जा मुझे नही खेलना रूठ कोई ओर जाता है,
टूट कोई ओर जाता है।


बिन बात के ही रूठने की आदत है;किसी अपने का साथ पाने की चाहत है;
आप खुश रहें, मेरा क्या है; मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है.


ग़लत-रवी को तिरी मैं ग़लत समझता हूँ
ये बेवफ़ाई भी शामिल मिरी वफ़ा में है। 


चलो छोड़ो ये बहस कि वफ़ा किसने की
और बेवफा कौन है 
तुम तो ये बताओ कि आज ‘तन्हा’ कौन है। 


हम से कोई तअल्लुक़-ए-ख़ातिर तो है उसे
वो यार बा-वफ़ा सही बेवफ़ा तो है। 


क्यों जिंदगी इस तरह तुम दूर हो गए
क्या बात है जो इस तरह मगरूर हो गए।
हम तरसते रहे तुम्हारा प्यार पाने को
बेवफा बनकर तुम तो मशहूर हो गए।


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